जय श्री कृष्णः.श्री कृष्ण शरणं मम.श्री कृष्ण शरणं मम.चिन्ता सन्तान हन्तारो यत्पादांबुज रेणवः। स्वीयानां तान्निजार्यान प्रणमामि मुहुर्मुहुः ॥ यदनुग्रहतो जन्तुः सर्व दुःखतिगो भवेत । तमहं सर्वदा वंदे श्री मद वल्लभ नन्दनम॥ जय श्री कृष्णः

बुधवार, 27 अगस्त 2014

क्या माणिक्य रत्न मेरे लिए शुभ रहेगा....



मनुष्य एक सुन्दर भविष्य की हमेशा से ही इच्छा रखता है, और अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए वह अनेक प्रकार के यत्न और कौशिश भी करता है, कभी सफलता मिलती है और कभी असफलता प्राप्त होती है इसी कारण वो निराश हो जाता है. लेकिन फिर वह दुबारा से उस लक्ष्य को प्राप्त करने की कौशिश करता है, इसी कौशिश में वह ज्योतिष, तंत्र, मंत्र, यन्त्र आदि अनेक पद्धतियों का भी सहारा लेता है, उन में से एक रत्न धारण करने कि उसकी जिज्ञासा होती है, कि रत्न धारण करने से वह उस लक्ष्य को प्राप्त कर अपना जीवन सुखी बनाये, 

भारतीय ज्योतिष के अंतर्गत रत्न धारण करने के लिए सबसे अच्छा साधन जन्म कुंडली है , और रत्न धारण करते समय लगन का ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है क्यों कि राशि (चाहे जन्म की हो या प्रसिद्ध नाम से) के अनुसार रत्न का प्रयोग अनुभव में सटीक नही बैठता है,

अतः जन्म लगन अनुसार रत्न धारण करें तथा जिस रत्न को आप धारण करने जा रहे है वह रत्न लाभ दायक हो और आपके लक्ष्य की पूर्ति करने में सहायक है तभी धारण करें किसी के देखा देखी कभी भी रत्न का  प्रयोग ना करें और इसके लिए अपने निकट के विद्वान ज्योतिषी जी से परामर्श अनिवार्य है, इस प्रकार यदि आप रत्न धारण करते है तो आपको शत प्रतिशत सफलता प्राप्त होगी....

अतः आज रत्नों की इस श्रंखला में सूर्य रत्न माणिक्य का वर्णन कर रहा हूँ ...



माणिक्य रत्न को अनेक नामों से जाना गया है. इसे कुरविन्द, वसुरत्न, रत्ननायक और लोहितरत्न के अतिरिक्त रविरत्न और लक्ष्मी पुष्य नाम से भी सुशोभित किया गया है हिन्दी और मराठी में इसे क्रमश: माणिक्य, माणिक कहा गया है. 

माणिक्य रत्न के विषय में एक मान्यता है, कि इस रत्न को धारण करने वाले के घर में दरिद्रता का नाश होता है. 

और घर में सुख -वैभव की वृ्द्धि होती है. 


माणिक्य रत्न सूर्य रत्न है. और सूर्य को आत्मा कहा गया है.  माणिक्य रत्न किन व्यक्तियों को धारण करना चाहिए. और कौन से व्यक्ति इस रत्न को कदापि धारण न करें

मेष लग्न--

मेष लग्न के लिये सूर्य पंचम भाव यानि त्रिकोण भाव का स्वामी है. और साथ ही ये लग्नेश मंगल के मित्र भी होते है. अत: मेष लग्न के व्यक्तियों के लिये माणिक्य रत्न धारण करना विधा क्षेत्र की बाधाओं को दूर करने में सहयोग करेगा. इसके रत्न के प्रभाव से मेष लग्न के व्यक्ति को बुद्धि कार्यो में रुचि बढती है. यह रत्न इन्हें आत्मोन्नति के लिये, संतान प्राप्ति के लिये, प्रसिद्धि, राज्यकृ्पा प्राप्ति के लिये मेष लग्न के व्यक्तियों को सदैव धारण करना चाहिए. 

वृषभ लग्न--

वृषभ लग्न के लिये सूर्य चतुर्थ भाव के स्वामी है. परन्तु यहां सूर्य लग्नेश शुक्र के मित्र न होकर, शत्रु है. वृषभ लग्न के व्यक्ति को माणिक्य रत्न केवल सूर्य महादशा में धारण करना चाहिए. वृ्षभ लग्न के लिये सूर्य रत्न माणिक्य महादशा अवधि में सुख-शान्ति, मातृ्सुख और भूमि सुख में वृ्द्धि करता है. 

मिथुन लग्न के--

इस लग्न के लिये सूर्य तीसरे घर के स्वामी है. इसलिये माणिक्य रत्न धारण करना मिथुन लग्न के व्यक्तियों के लिये कभी भी लाभकारी नहीं रहेगा. 

कर्क लग्न--

इस लग्न के व्यक्तिओं के लिए सूर्य दूसरे भाव यानि धन भाव का स्वामी है. साथ ही इस लग्न के लिये यह लग्नेश चन्द्र का मित्र भी है. अत: धन संचय करने के लिये माणिक्य रत्न धारण किया जा सकता है. परन्तु दूसरा भाव मारक भाव भी है. अर्थात कुछ शारीरिक कष्ट बढ सकते है. इसलिए वृ्षभ लग्न के लिये उतम रहेगा, मोती धारण करना इसकी तुलना में अधिक शुभ रहेगा. 
  

सिंह लग्न--

सिंह लग्न का स्वामी सूर्य स्वयं है. इस लग्न के व्यक्तियों को आजीवन रत्न धारण करना चाहिए. इससे शत्रु को परास्त करने में सफलता मिलेगी,शारीरिक व मानसिक स्वास्थय की वृ्द्धि होगी, आयु में वृ्द्धि होगी व यह रत्न मानसिक संतुलन बनाये रखने में भी सहायता करेगा. 

कन्या लग्न--

कन्या लग्न के व्यक्तियों को माणिक्य रत्न कभी भी धारण नहीं करना चाहिए.  इस लग्न के लिये सूर्य 12 वें भाव के स्वामी होते है. 

तुला लग्न--

तुला लग्न के सूर्य आय भाव के स्वामी होते है. और लग्नेश शुक्र के शत्रु भी. इस कारण से इसे केवल सूर्य महादशा में धारण करना अनुकुल रहता है. अन्यथा पन्ना धारण करना तुला लग्न के इनके लिये विशेष शुभ रहता है. 
   

वृश्चिक लग्न--

इस लग्न के लिये सूर्य दशम भाव के स्वामी है. व लग्नेश मंगल के मित्र भी है. इसलिए इस लग्न के व्यक्तियों के लिये माणिक्य रत्न राज्यकृ्पा, मानप्रतिष्ठा तथा नौकरी, व्यवसाय में उन्नति देता है. 

धनु लग्न--

धनु लग्न में सूर्य नवम भाव यानि भाग्य भाव के स्वामी है. इसके अतिरिक्त ये लग्नेश गुरु के मित्र भी है. धनु लग्न के व्यक्तियों का माणिक्य रत्न धारण करना सर्वश्रेष्ठ शुभ फल देता है. इसे धारण करने से इन्हें जीवन के सभी सुखों की प्राप्ति में सहायता मिलती है. भाग्य वृ्द्धि और पिता सुख में सहयोग मिलता है. 

मकर लग्न--

इस लग्न के लिये सूर्य अष्टम भाव के स्वामी है. लग्नेश शनि के शत्रु भी है. मकर लग्न के व्यक्ति माणिक्य रत्न कभी भी धारण न करें.

कुम्भ लग्न--

कुम्भ लग्न के लिये सूर्य सप्तम भाव के स्वामी है. लग्नेश शनि से इनकी शत्रुता भी है. इसलिये जहां तक संभव हो इन्हें माणिक्य रत्न धारण करने से बचना चाहिए. 

मीन लग्न--

मीन लग्न के लिये सूर्य छठे भाव यानि रोग भाव के स्वामी है. लग्नेश गुरु के मित्र है.  विशेष परिस्थितियों में भी केवल सूर्य महादशा में ही माणिक्य रत्न धारण करें. अन्यथा इसे धारण करना शुभ नहीं है. 
  

माणिक्य रत्न के साथ कौन सा रत्न शुभ और अनुकूल रहेगा 

माणिक्य रत्न धारण करने वाला व्यक्ति इसके साथ में मोती, मूंगा और पुखराज या इन्हीं रत्नों के उपरत्न धारण कर सकता है.

माणिक्य रत्न के साथ कौन सा रत्न ना पहने ?

माणिक्य रत्न के साथ कभी भी एक ही समय में हीरा, नीलम या पन्ना धारण नहीं करना चाहिए. इसके अतिरिक्त माणिक्य रत्न के साथ इन्ही रत्नों के उपरत्न धारण करना भी शुभ फलकारी नहीं रहता है.   

अगर आप अपने लिये शुभ-अशुभ रत्नों के बारे में पूरी जानकारी चाहते हैं ...तो अपने निकट के विद्वान ज्योतिषी जी से संपर्क करें या Astro Adviser पर अपनी जन्म तिथि, जन्म समय, जन्म स्थान तथा अपनी समस्या भेजकर  रत्न रिपोर्ट बनवायें. इसमें आपके कैरियरआर्थिक मामलेपरिवारभाग्यसंतान आदि के लिये शुभ रत्न पहनने कि विधी व अन्य उपाय की भी जानकारी मिल जायेगी..

अतः अपनी समस्याओं के समाधान के लिए आप AstroAdviser में जाकर कमेंट्स कर पूछ सकते है..

शुभमस्तु !!





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