जय श्री कृष्णः.श्री कृष्ण शरणं मम.श्री कृष्ण शरणं मम.चिन्ता सन्तान हन्तारो यत्पादांबुज रेणवः। स्वीयानां तान्निजार्यान प्रणमामि मुहुर्मुहुः ॥ यदनुग्रहतो जन्तुः सर्व दुःखतिगो भवेत । तमहं सर्वदा वंदे श्री मद वल्लभ नन्दनम॥ जय श्री कृष्णः

बुधवार, 3 सितंबर 2014

क्या मूंगा मेरे लिए लाभदायक होगा .....


मनुष्य एक सुन्दर भविष्य की हमेशा से ही इच्छा रखता है, और अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए वह अनेक प्रकार के यत्न और कौशिश भी करता है, कभी सफलता मिलती है और कभी असफलता प्राप्त होती है इसी कारण वो निराश हो जाता है. 

लेकिन फिर वह दुबारा से उस लक्ष्य को प्राप्त करने की कौशिश करता है, 

इसी कौशिश में वह ज्योतिष, तंत्र, मंत्र, यन्त्र आदि अनेक पद्धतियों का भी सहारा लेता है, उन में से एक रत्न धारण करने कि उसकी जिज्ञासा होती है, कि रत्न धारण करने से वह उस लक्ष्य को प्राप्त कर अपना जीवन सुखी बनाये, 

भारतीय ज्योतिष के अंतर्गत रत्न धारण करने के लिए सबसे अच्छा साधन जन्म कुंडली है , और रत्न धारण करते समय लग्न  का ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है क्यों कि राशि (चाहे जन्म की हो या प्रसिद्ध नाम से) के अनुसार रत्न का प्रयोग अनुभव में सटीक नही बैठता है,

अतः जन्म लगन अनुसार रत्न धारण करें तथा जिस रत्न को आप धारण करने जा रहे है वह रत्न लाभ दायक हो और आपके लक्ष्य की पूर्ति करने में सहायक है तभी धारण करें किसी के देखा देखी कभी भी रत्न का  प्रयोग ना करें और इसके लिए अपने निकट के विद्वान ज्योतिषी जी से परामर्श अनिवार्य है, 

इस प्रकार यदि आप रत्न धारण करते है तो आपको शत प्रतिशत सफलता प्राप्त होगी....

अतः आज रत्नों की इस श्रंखला में मंगल का  रत्न मूंगा  का वर्णन कर रहा हूँ ...




मंगल रत्न मूंगा को प्रवाल, विद्रुम, लतामणी, रक्तांग आदि नामों से जाना जाता है. मूंगा धारण करने से व्यक्ति में साहस, पराक्रम, धीरज, शौर्य भाव की वृ्द्धि होती हे. यह रत्न मुकदमा, जेल आदि परेशानियों में भी कमी करने में सहयोग करता है. 
मूंगा रत्न जब व्यक्ति अपने लग्न की जांच कराने के बाद धारण करता है, तो यह धारणकर्ता को शुभ और अनुकुल फल देता है. इस स्थिति में यह व्यक्ति को व्यर्थ के विवादों से बचाता है, क्रोध में कमी करता है, और पहल करने का गुण देता है. परन्तु अगर यह धारण करने वाले व्यक्ति के लग्न के लिये शुभ नहीं हो तो इसे धारण करने के फल इसके विपरीत प्राप्त हो सकते है. 

मेष लग्न-

मेष लग्न के व्यक्तियों के लिये मंगल लग्नेश और अष्टमेश होते है. इस लग्न के लिये लग्नेश होने के कारण मंगल शुभ है. अत: मेष लग्न के व्यक्तियों का मूंगा रत्न धारण करना शुभ है. इसे धारण करने से इन्हें, स्वास्थय, मान व प्रतिष्ठा की प्राप्ति होगी.

वृ्षभ लग्न-

वृ्षभ लग्न में मंगल 7वे ओर 12 वें भाव के स्वामी है. जो शुभ नहीं है. इस स्थिति में इस लग्न के व्यक्तियों को मंगल रत्न मूंगा नहीं धारण करना चाहिए. विशेष स्थिति में इसे मंगल महादशा में धारण किया जा सकता है.  

मिथुन लग्न-

इस लग्न के लिये मंगल की स्थिति 6वें व 11वें भाव के स्वामी के रुप में होती है. इस लग्न के व्यक्ति इस रत्न को केवल मंगल महादशा में ही धारण करे, तो इससे मिलने वाले फल व्यक्ति के लिये शुभ रहते है. 

कर्क लग्न-

कर्क लग्न का स्वामी चन्द्र और मंगल दोनों मित्र है. इस लग्न में मंगल 5वें व 10वें भाव के स्वामी है. ऎसे में कर्क लग्न के व्यक्तियों को मूंगा रत्न धारण करना शुभ फल देता है. इन व्यक्तियों को इस रत्न को धारण करने से बुद्धिबल, कैरियर की बाधाओं में कमी और शिक्षा का सहयोग आजीविका क्षेत्र में प्राप्त होता है.  

सिंह लग्न-

सिंह लग्न में मंगल चतुर्थ व नवम भाव के स्वामी है. लग्नेश सूर्य के मित्र भी है. इस कारण से सिंह लग्न के व्यक्तियों को मूंगा रत्न अवश्य धारण करना चाहिए. इसे धारण करने से व्यक्ति के भाग्य में वृ्द्धि होती है. और जीवन में सुख-संपति बनी रहती है.   

कन्या लग्न-

कन्या लग्न के लिये मंगल तीसरे व आंठवे भाव के स्वामी है. ये दोनों भाव अशुभ है. इसलिये कन्या लग्न के व्यक्तियों को मूंगा कभी भी धारण नहीं करना चाहिए. 
  

तुला लग्न-

तुला लग्न के व्यक्तियों के लिये मंगल दूसरे और सांतवें भाव के स्वामी है. दोनों ही भाव मारक भाव है. जहां तक हो सके इस लग्न के व्यक्तियों को इस रत्न को धारण करने से बचना चाहिए. मंगल महादशा में व्यक्ति को यह रत्न आर्थिक स्थिति और वैवाहिक जीवन को सुखमय बनाये रखने में सहयोग करेगा. साथ ही शारीरिक कष्ट बढा देगा. 

वृ्श्चिक लग्न-

वृ्श्चिल लग्न में मंगल लग्नेश होते है. इसलिए वृ्श्चिक लग्न के व्यक्ति मूंगा अवश्य धारण करें. 

धनु लग्न-

इस लग्न के लिये ये 5वें और 12वें भाव के स्वामी है. इस लग्न के व्यक्तियों का मंगल रत्न मूंगा धारण करना अनुकुल रहता है. इसे धारण करने से संतान सुख, बुद्धिबल, यश और प्रतिष्ठा की प्राप्ति होगी.   

मकर लग्न-

मकर लग्न में मंगल चतुर्थ और एकादश भाव के स्वामी है. इस लग्न के व्यक्ति इसे धारण कर सकते है.  

कुम्भ लग्न-

कुम्भ लग्न में मंगल तीसरे व दशवें भाव के स्वामी है. मध्यम स्तर के शुभ होने के कारण इसे केवल मंगल महादशा में ही धारण करना चाहिए. इस लग्न के व्यक्ति इसे धारण न करके नीळम रत्न धारण करने तो अधिक शुभ रहेगा. 
  

मीन लग्न-

मीन लग्न में मंगल दूसरे व नवम भाव के स्वामी है. इस लग्न के व्यक्तियों को हमेशा मूंगा रत्न धारण करके रहना चाहिए. यह रत्न इस लग्न के व्यक्तियों के भाग्य की बाधाओं को हटाने में सहयोग करेगा. 
     
मूंगा रत्न के साथ दुसरे कौन से रत्न पहने ?

मूंगा रत्न धारण करने वाला व्यक्ति इसके साथ में मोती, माणिक्य और पुखराज या इन्हीं रत्नों के उपरत्न धारण कर सकता है. 

मूंगा रत्न के साथ क्या न पहने 

मूंगा रत्न के साथ कभी भी एक ही समय में हीरा, नीलम या पन्ना धारण नहीं करना चाहिए. इसके अतिरिक्त मूंगा रत्न के साथ इन्ही रत्नों के उपरत्न धारण करना भी शुभ फलकारी नहीं रहता है.  

अगर आप अपने लिये शुभ-अशुभ रत्नों के बारे में पूरी जानकारी चाहते हैं ...तो अपने निकट के विद्वान ज्योतिषी जी से संपर्क करें या Astro Adviser पर अपनी जन्म तिथि, जन्म समय, जन्म स्थान तथा अपनी समस्या भेजकर  रत्न रिपोर्ट बनवायें. इसमें आपके कैरियरआर्थिक मामलेपरिवारभाग्यसंतान आदि के लिये शुभ रत्न पहनने कि विधी व अन्य उपाय की भी जानकारी मिल जायेगी..

अतः अपनी समस्याओं के समाधान के लिए आप AstroAdviser में जाकर कमेंट्स कर पूछ सकते है..

शुभमस्तु !! 
















2 टिप्‍पणियां:

  1. दीपक कुमार तिवारी राशि नाम तोष कुमार जनम 16 जनवरी 1985 समय सुबह 09। 45 बजे ।। स्थान नरसिंहपुर मध्य प्रदेश । वृश्चिक राशि है मेरी । आप बताये मेरे लिए धन आर्थिक सम्पन्नता के हिसाब से कौनसा रत्न धारण करना चाहिए।
    deepakav56@gmail.com
    9425949434 Whats app

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    1. आपकी जन्म कुंडली अनुसार आपको पन्ना रत्न धारण करना चाहिए और माँ दुर्गा की उपासना आपके लिए शुभ है वर्तमान में शनी की साड़ेसती भी चल रही है इसलिए शनि का दान अवश्य करें लाभ होगा

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