जय श्री कृष्णः.श्री कृष्ण शरणं मम.श्री कृष्ण शरणं मम.चिन्ता सन्तान हन्तारो यत्पादांबुज रेणवः। स्वीयानां तान्निजार्यान प्रणमामि मुहुर्मुहुः ॥ यदनुग्रहतो जन्तुः सर्व दुःखतिगो भवेत । तमहं सर्वदा वंदे श्री मद वल्लभ नन्दनम॥ जय श्री कृष्णः

बुधवार, 13 अप्रैल 2016

मेष लग्न में शुभ अशुभ ग्रहों का उपाय......


ज्योतिष शास्त्र में मनुष्य के जीवन की समस्त घटनाओं को जान्ने के लिए हमारे ऋषि मिनियों ने तप और साधना कर जन्म कुंडली का साधन दिया उस जन्म कुंडली में नौ ग्रह, बारह राशियाँ तथा सत्ताईस नक्षत्रों का वर्णन किया इन सबके आपस में जो योग बनते है और दशाओं का ज्ञान से मनुष्य अपने भविष्य में शुभ अशुभ देखने की कौशिश करता है.

उसी अन्तरिक्ष विज्ञान के अनुसार हमारा अन्तरिक्ष 12 भागों में विभाजित कर प्रत्येक भाग को 30 डिग्री का मान कर उसमें नक्षतों का मान निश्चित किया तथा उन 12 भागों को अलग अलग नाम से प्रतिष्ठित किया गया, उसी भाग के पहले भाग का नाम "मेष राशि" है.ये अग्नि तत्व  राशि मानी जाती है तथा मेष राशि का स्वामी मंगल है, अश्विनी नक्षत्र के चार चरण तथा भरणी नक्षत्र के चार चरण और कृतिका नक्षत्र का पहला चरण इन नौ चरणों से इसका उद्भव हुआ है.


 ये चर स्वभाव वाली है अर्थात मेष राशि वाले सदा चलायमान रहते है एक स्थान पर ज्यादा दिनों तक नही टिक पाते है. इसका चिन्ह "मेढ़ा" है, जो पर्वतों में पाया जाता है, इसलिए इस राशि वालो को पहाड़ी स्थान पसंद होते है, इसका रंग लाल होने  से इनमें अधिक तीव्रता होती है.

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