जय श्री कृष्णः.श्री कृष्ण शरणं मम.श्री कृष्ण शरणं मम.चिन्ता सन्तान हन्तारो यत्पादांबुज रेणवः। स्वीयानां तान्निजार्यान प्रणमामि मुहुर्मुहुः ॥ यदनुग्रहतो जन्तुः सर्व दुःखतिगो भवेत । तमहं सर्वदा वंदे श्री मद वल्लभ नन्दनम॥ जय श्री कृष्णः

शनिवार, 16 अप्रैल 2016

पीपल द्वारा समस्त बाधाएं दूर करें......

इस लेख से पहले भी मैंने पीपल वृक्ष पर एक लेख लिखा था. आज उसी विषय को आगे बड़ाता हुआ, पीपल वृक्ष के जो दिव्य गुण है, उसे हमारे ज्योतिष के अंतर्गत नक्षत्रों के योग से मिलाकर किस प्रकार लाभ प्राप्त कर सकते है. उसी पर आज का यह लेख आपके सामने प्रस्तुत कर रहा हूँ. जैसा कि विदित है कि पीपल वृक्ष, साधारण वृक्ष नहीं है, बल्कि दिव्यता से परिपूर्ण है.और ज्योतिषीय दृष्टि से भी पीपल एक दिव्य शक्ति से परिपूर्ण वृक्ष है. शास्त्रों में वर्णित है कि पीपल में प्रतिदिन एक अलग प्रकार की अदृश्य दिव्यता होती है. इसी प्रकार प्रत्येक नक्षत्र वाले दिन भी इसका विशिष्ट गुण भिन्नता लिए हुए होता है.

भारतीय ज्योतिष शास्त्र में कुल मिला कर 28 नक्षत्रों कि गणना है, तथा प्रचलित केवल 27 नक्षत्र है उसी के आधार पर प्रत्येक मनुष्य के जन्म के समय नामकरण होता है. अर्थात मनुष्य का नाम का प्रथम अक्षर किसी ना किसी नक्षत्र के अनुसार ही होता है. तथा इन नक्षत्रों के स्वामी भी अलग अलग ग्रह होते है. विभिन्न नक्षत्र एवं उनके स्वामी निम्नानुसार है यहां नक्षत्रों के स्वामियों के नाम कोष्ठक के अंदर लिख रहा हूँ जिससे आपको आसानी रहे.

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(१)अश्विनी(केतु), 
(२)भरणी(शुक्र), 
(३)कृतिका(सूर्य), 
(४)रोहिणी(चन्द्र), 
(५)मृगशिर(मंगल), 
(६)आर्द्रा(राहू), 
(७)पुनर्वसु(वृहस्पति), 
(८)पुष्य(शनि), 
(९)आश्लेषा(बुध), 
(१०)मघा(केतु), 
(११)पूर्व फाल्गुनी(शुक्र), 
(१२)उत्तराफाल्गुनी(सूर्य), 
(१३)हस्त(चन्द्र), 
(१४)चित्रा(मंगल), 
(१५)स्वाति(राहू), 
(१६)विशाखा(वृहस्पति), 
(१७)अनुराधा(शनि), 
(१८)ज्येष्ठा(बुध), 
(१९)मूल(केतु), 
(२०)पूर्वाषाढा(शुक्र), 
(२१)उत्तराषाढा(सूर्य), 
(२२)श्रवण(चन्द्र), 
(२३)धनिष्ठा(मंगल), 
(२४)शतभिषा(राहू), 
(२५)पूर्वाभाद्रपद(वृहस्पति), 
(२६)उत्तराभाद्रपद(शनि) 
एवं (२७)रेवती(बुध)..


ज्योतिष शास्त्र अनुसार प्रत्येक ग्रह 3, 3 नक्षत्रों के स्वामी होते है. कोई भी व्यक्ति जिस भी नक्षत्र में जन्मा हो वह उसके स्वामी ग्रह से सम्बंधित दिव्य प्रयोगों को करके लाभ प्राप्त कर सकता है. अपने जन्म नक्षत्र के बारे में अपनी जन्मकुंडली को देखें या अपनी जन्मतिथि और समय व् जन्म स्थान लिखकर भेजे.या अपने विद्वान ज्योतिषी से संपर्क कर जन्म का नक्षत्र ज्ञात कर के यह सर्व सिद्ध प्रयोग करके लाभ उठा सकते है.विभिन्न ग्रहों से सम्बंधित पीपल वृक्ष के प्रयोग निम्न है.

पीपल का वृक्ष इस कलयुग में कल्प वृक्ष के समान है, जो भी कामना हो उस कामना को पीपल के अधिष्ठित देव पूर्ण करते है.अतः पीपल वृक्ष से कामना पूरी करने के लिए प्रत्येक शनिवार सूर्य देव निकलने से पूर्व स्नान आदि कर अपना मन  पीपल वृक्ष में लगाएं तथा एक लौटे में जल लेकर उस जल में थोड़ी थोड़ी मात्रा में दूध, शक्कर, शहद, काले तिल, गंगा जल और चुटकी भर गुड मिला लें.साथ ही एक आटे के पेड़े का दीपक बना लें सरसों के तेल दीपक में डालें, उस दीपक में एक छोटी काली वाली कील (जो कि जूते आदि में काम आती है वो ही कील लें) तथा 11 दाने साबुत काली उड़द भी उस दीपक में डाल लें इन सबको श्रद्धा तथा अपनी कामना का ध्यान करते हुए जल पीपल की जड़ में अर्पण करें दीपक प्रज्ज्वलित कर प्रणाम करें तथा एक धुप बत्ती जला कर अपने सीधे हाथ में लेकर पीपल वृक्ष की 11 परिक्रमा करें.

अपने बांये हाथ से पीपल के जड़ का स्पर्श कर अपने माथे में लगाये, इस प्रकार 11 शनिवार करने के बाद 11 पीपल के पौधे लेकर अन्य स्थानों में लगाए और उनके थोडें बड़ें होने तक देख भाल करें.

इस प्रकार पीपल के वृक्ष की सेवा करने से शनि सहित सभी ग्रहों की शान्ति होगी ही साथ ही समस्त देवता आपके लिए अनुकूल होंगे. सभी मनोकामनाएं भी जल्दी पूर्ण होंगी.


आगे के भागों में प्रत्येक नक्षत्र के ग्रह का पीपल वृक्ष के माध्यम से  उपाय बतायेंगे.....


श्रीरस्तु !!

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