जय श्री कृष्णः.श्री कृष्ण शरणं मम.श्री कृष्ण शरणं मम.चिन्ता सन्तान हन्तारो यत्पादांबुज रेणवः। स्वीयानां तान्निजार्यान प्रणमामि मुहुर्मुहुः ॥ यदनुग्रहतो जन्तुः सर्व दुःखतिगो भवेत । तमहं सर्वदा वंदे श्री मद वल्लभ नन्दनम॥ जय श्री कृष्णः

रविवार, 15 मई 2016

विवाह के पश्चात " सम्बन्ध " क्यों और उपाय......

विवाह संस्कार एक शुद्ध सनातन परम्परा है, विवाह प्रेम तथा आकर्षण का पर्याय है तथा अपने पितृ देवों की प्रसन्नता के लिए एवं वंश वृद्धि के लिए जिस  से पितृ देव प्रसन्न रहे. इस पृथ्वी पर जिसने भी जन्म लिया उसका विवाह  निश्चित है , बस कुछ लोगों को छोड़ कर लगभग सभी का विवाह होता है.

मनुष्य ही नही पशु आदि सभी के जोड़े बनते है.अतः विवाह एक आवश्यक क्रिया है जिसके द्वारा मनुष्य ब्रह्मचर्य  आश्रम से गृहस्थ आश्रम में प्रवेश करता है, एक शुद्ध संस्कार के रूप में सनातन धर्म में इसकी मान्यता है. इस शुद्ध प्रेम के प्रतीक विवाह में उस समय दोष लग जाता है जब पति या पत्नी द्वारा उसके जीवन में किसी महिला या किसी पुरुष का प्रवेश हो जाता है, ये प्रवेश व्यभिचार या चरित्र दोष बनने लगता है,

इसी विवाहोत्तर सम्बन्ध के कारण वैवाहिक जीवन दुखमय हो जाता है,  यही नही इसी दोष के कर्ण भाग्य भी कमजोर हो कर बिगड़ने लगता है. कई बार इसी के कारण सुखी घर परिवार टूट जाता है, आखिर  क्यों ? ऐसा क्यों होता है ? यदि ज्योतिष की दृष्टि से इसका कारण देखते है तो इसका दूर करने का उपाय बभी ज्योतिष शास्त्र हमें बताता है, बहुत बार पुरुष और महिला इस दुष्कृत्य के कारण परेशान भी हो जाते है वो इस सम्बन्ध से पीछा भी छुडाना चाहते है लेकिन सफल नही होते है, आज इसी दोष पर ज्योतिष अनुसार इसका उपाय देखते है.. 

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भारतीय ज्योतिष अनुसार विवाहोत्तर सम्बन्ध  अर्थात Extra Marital Affair कब और क्यों होते है ? क्या इस सम्बन्ध को रोका जा सकता है या इस को बिलकुल ख़त्म किया जा सकता है? इसका जवाब भारतीय जोतिश के माध्यम से हमारे ऋषि मुनियीं ने बहुत ही सरल रूप से बताया है, इसके सूत्र भी ज्योतिष में स्पष्ट किये है. जन्म कुंडली द्वारा ज्योतिषी पहचान कर सकता है कि किस पुरुष स्त्री का इस प्रकार से दोष होगा या नही. तथा ऐसे कोन से योग भारतीय ज्योतिष में विद्यमान है  जिसके कारण विवाहोत्तर सम्बन्ध बनते है. सर्व प्रथम पुरुष अथवा महिला की जन्म कुंडली द्वारा योग देखें ये सब कुंडली मिलान के समय देखना अत्यंत आवश्यक होता है तभी विवाह की आज्ञा ज्योतिषी को करनी चाहिए.

पुरुष की कुंडली में शुक्र ग्रह आकर्षण पैदा करता है. तथा महिला की कुंडली में वृहस्पति देव आकर्षण पैदा करते है, जिस पुरुष का शुक्र ग्रह मजबूत होगा और जिस महिला का वृहस्पति ग्रह मजबूत या शुभ होंगे उनमें आकर्षण पैदा करने की अद्भुत क्षमता होती है, शुक्र ग्रह  वैवाहिक जीवन में एक दुसरे के प्रति प्यार तथा आकर्षण बनाता है, इसी प्रकार वृहस्पति भी वैवाहिक जीवन में पति के प्रति प्यार और आकर्षण का निर्माण करता है.इन दोनों में मंगल ग्रह के कारण प्रेम तथा एक दुसरे के प्रति समर्पित भाव उत्पन्न होता है,  

इस प्रकार शुक्र ग्रह, वृहस्पति ग्रह तथा मंगल के सहयोग से वैवाहिक जीवन आनंदित और सुखमय बन जाता है, इसी बीच यदि राहू का इन ग्रहों पर दृष्टि या युति होने से भटकाव की स्थिति उत्पन्न होने लगती है, राहू के हस्तक्षेप के कारण वैवाहिक जीवन दुखमय बनने लगता है, यदि राहू शुक्र ग्रह को अपनी बुरी दृष्टि से देखता है या साथ में स्थित हो जाता है तो पुरुष का दूसरी महिला की तरफ झुकाव होने लगता है,इसी प्रकार यदि राहू महिला की कुंडली में वृहस्पति ग्रह को अपनी अशुभ दृष्टि से देखता है या युति कर लेता है तो उस महिला का झुकाव किसी अन्य पुरुष की तरफ होने लगता है अर्थात विवाहोत्तर सम्बन्ध बन जाते है.

इसके साथ साथ यदि जन्मकुंडली अनुसार शुक्र+मंगल, या शुक्र + राहू + मंगल की युति या दृष्टि हो जाए तो व्यभिचार और चरित्र दोष लग जाता है.इसी के साथ जब चन्द्रमा कमजोर हो जाए तो पति पत्नी दोनों का एक दुसरे से लगाव बिलकुल समाप्त हो जाता है तथा दोनों ही अलग अलग विवाहोत्तर सम्बन्ध में फंस जाते है अर्थात व्यभिचार की श्रेणी में आते है. यदि राहू की अशुभ दृष्टि सातवें भाव में पड़ रही हो या शुक्र, वृहस्पति या चन्द्रमा के साथ हो तो निश्चित रूप से विवाहोत्तर सम्बन्ध बनेंगे.

इस विवाहोत्तर सम्बन्ध को इन्ही ज्योतिष सूत्रों द्वारा उपचार कर के दूर किया जा सकता है,

ॐ नमः शिवाय मंत्र की 7  मालाएं प्रतिदिन शाम के समय भगवान शिव के सामने जाप कोई भी परिवार का सदस्य इनका नाम लेकर करने में लाभ होगा,

भगवान विष्णु जी के समक्ष पीले फूल वृहस्पतिवार प्रातः अर्पण करवाएं.

घर में कहीं भी लीकेज हो तो दूर करें,

दक्षिण - पश्चिम दिशा(नेऋत्य कोण) में कोई भी एक जैसे दो वस्तु नही होनी चाहिए,

बेडरूम में भी एक जैसी दो वस्तु  कभी ना रखें,

बेडरूम में कभी भी शराब और नॉन वेज ना खाए,

पूजा स्थल पर कोई ताबीज या कोई भी यन्त्र आदि भूल कर भी ना रखें.


इसके साथ अपने विद्वान ज्योतिषी द्वारा शुक्र ग्रह तथा वृहस्पति देव की शान्ति का जाप अवश्य करवाएं, ऐसा करने से जल्दी लाभ होगा तथा वैवाहिक जीवन सुखमय बन जाएगा...


शुभमस्तु !!



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